एमसीबी, 13 अक्टूबर 2026। आगामी रबी सीजन 2026-27 में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता आसान बनाने और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग नई डिजिटल प्रणाली लागू करने जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत अब किसानों को उनकी वास्तविक कृषि भूमि और बोई जाने वाली फसल के रकबे के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। डिजिटल टोकन और क्यूआर कोड आधारित इस प्रणाली से खाद वितरण में होने वाली कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने जैसी अनियमितताओं पर लगाम लगाने की तैयारी है।
FFS सॉफ्टवेयर से होगा खाद वितरण, रकबे के अनुसार तय होगी मात्रा
नई व्यवस्था का संचालन फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उप संचालक कृषि के मार्गदर्शन में विकासखंड मनेन्द्रगढ़ में एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेताओं, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों, कृषि विकास अधिकारियों, उर्वरक निरीक्षकों और प्रगतिशील किसानों को नई प्रणाली की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि किसान अपने एंड्रॉइड मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से FFS Fertilizer App डाउनलोड कर आधार नंबर अथवा फार्मर आईडी के माध्यम से लॉगिन कर सकेंगे। इसके बाद भूमि, फसल और नजदीकी निजी या सहकारी खाद विक्रय केंद्र का चयन करने पर डिजिटल टोकन और क्यूआर कोड जारी होगा।
किसानों की भूमि संबंधी जानकारी भुइयां भू-अभिलेख एवं गिरदावरी में दर्ज रकबे के आधार पर सत्यापित की जाएगी। इसके बाद वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुरूप उर्वरक की मात्रा निर्धारित होगी। इससे खाद का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने के साथ वितरण में अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलेगी।
स्मार्टफोन नहीं है तो भी नहीं रुकेगा किसानों का काम
डिजिटल व्यवस्था के कारण स्मार्टफोन नहीं रखने वाले किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा सेवा सहकारी समिति के ऑपरेटर की सहायता से अपना डिजिटल टोकन प्राप्त कर सकेंगे।
खाद विक्रय केंद्रों पर विक्रेता पीओएस मशीन के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन करेंगे। इसके बाद आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर निर्धारित सरकारी दर पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। किसान के स्वयं उपस्थित नहीं हो पाने की स्थिति में अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से ओटीपी और आधार प्रमाणीकरण की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

ओवररेटिंग, कालाबाजारी और जबरन टैगिंग पर कसेगा शिकंजा
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक राशि लेने, यूरिया या डीएपी के साथ अन्य उत्पाद जबरन बेचने अथवा पीओएस मशीन के बिना उर्वरक का विक्रय करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा खाद विक्रेताओं के भौतिक स्टॉक और आईएफएमएस पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन स्टॉक का नियमित मिलान भी किया जाएगा, ताकि स्टॉक में गड़बड़ी और अनियमित बिक्री पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
गांव-गांव चौपाल लगाकर किसानों को सिखाई जाएगी डिजिटल प्रक्रिया
कार्यशाला में जिला स्तरीय नोडल अधिकारी एवं सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी महेश पैकरा, अनुविभागीय कृषि अधिकारी धर्मेन्द्र , वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रवि गुप्ता तथा जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर दीपक कुमार साहू उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने कृषि विभाग के मैदानी अमले को निर्देशित किया कि नई व्यवस्था का किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि रबी सीजन शुरू होने के साथ ही किसान डिजिटल टोकन प्रणाली का आसानी से उपयोग कर सकें।
इसके लिए आगामी दिनों में जिले के सभी विकासखंडों और ग्राम पंचायतों में किसान चौपाल आयोजित की जाएंगी। इन चौपालों में डिजिटल टोकन एवं क्यूआर कोड प्रणाली की जानकारी देने के साथ मोबाइल ऐप के उपयोग और टोकन प्राप्त करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया जाएगा।
कृषि विभाग का उद्देश्य है कि रबी सीजन में पात्र किसानों को उनकी जरूरत और निर्धारित मानकों के अनुसार समय पर खाद मिले तथा वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। नई प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को खाद के लिए होने वाली अनावश्यक परेशानी कम होने और उर्वरक बाजार में अनियमितताओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
