NH-43 एवं शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक, हादसों में जा रही जानें; आखिर कब जागेगा नगर पालिका एवं जिला प्रशासन?

बारिश और धूप में बेअसर हुए रेडियम बेल्ट! पशु मालिकों पर जुर्माना, एफआईआर और सख्त कार्रवाई की उठी मांग

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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NH-43 एवं शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक, हादसों में जा रही जानें; आखिर कब जागेगा नगर पालिका एवं जिला प्रशासन?

मनेन्द्रगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग-43 सहित शहर की प्रमुख सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बनते जा रहे हैं। सड़कों पर अचानक सामने आ जाने वाले मवेशियों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोग असमय अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद स्थानीय नगर पालिका प्रशासन की ओर से इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है?

रेडियम बेल्ट लगाने की पहल पर भी उठे सवाल

कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर घूम रहे आवारा पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट बांधने की कार्रवाई की गई थी। इसका उद्देश्य रात के अंधेरे में रेडियम की चमक से वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशु दूर से दिखाई देना था, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके। यह पहल निश्चित रूप से दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक प्रयास थी, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी और चर्चाओं के अनुसार, लगाए गए कुछ रेडियम बेल्ट की गुणवत्ता कथित तौर पर खराब थी, जिसके कारण बारिश और धूप के संपर्क में आने से उनके खराब होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति की जांच कराया जाना जरूरी है। यदि बेल्ट निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं थे, तो संबंधित सामग्री की गुणवत्ता और उसे लगाने की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।

पशु मालिकों की जवाबदेही तय करे प्रशासन

सड़कों पर खुलेआम घूमने वाले मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को केवल संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पशुओं को खुला छोड़ने वाले मालिकों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही नियमों के अनुसार जुर्माना लगाने और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठ रही है। आवश्यक साक्ष्य और कानूनी प्रावधानों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

जिला प्रशासन को चाहिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग-43 और अन्य प्रमुख सड़कों पर विशेष निगरानी अभियान चलाकर आवारा पशुओं की पहचान कराई जाए तथा उनके मालिकों को पशुओं को खुला छोड़ने से रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए जाएं। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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नगर पालिका की जिम्मेदारी भी तय हो

शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की समस्या के समाधान में नगर पालिका प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। नगर पालिका को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, उनके मालिकों की पहचान करने और समस्या की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित अभियान चलाना चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर दुर्घटना संभावित स्थानों पर भी विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए।

हादसों पर अंकुश के लिए अब ठोस कार्रवाई जरूरी

सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर मौजूद खतरों को दूर करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। रेडियम बेल्ट लगाने जैसी अस्थायी व्यवस्था के साथ-साथ आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वाहन चालकों और आम नागरिकों की जान पर खतरा बना रहेगा।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के साथ-साथ उनके मालिकों की जवाबदेही तय करने के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।

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