एमसीबी। जिले की तीनों जनपद पंचायतों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में भवन/मकान कर की वसूली को लेकर जारी निर्देशों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। जिला पंचायत द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्रत्येक भवन/मकान से ₹1,200 वार्षिक अथवा ₹100 प्रतिमाह कर वसूल किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कर वसूली नहीं होने की स्थिति में संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन रोकने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दिए जाने का भी दावा किया जा रहा है।
इस मामले को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की ग्रामीण जनता पहले से ही महंगाई, बढ़ते बिजली बिल, बेरोजगारी और रोजमर्रा की बढ़ती लागत से परेशान है। ऐसे समय में ग्रामीण परिवारों पर भवन या मकान कर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना सरकार की जनहित की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि “क्या डबल इंजन सरकार अब महंगाई और बढ़े हुए बिजली बिल के बाद ग्रामीणों से संपत्ति कर वसूलकर उनकी जेब पर एक और हमला करने जा रही है? जब जनता आर्थिक संकट से जूझ रही है, तब सरकार राहत देने के बजाय नया कर थोपने में लगी है।”
उन्होंने कहा कि गांवों में बड़ी संख्या में गरीब, किसान, मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवार निवास करते हैं। ऐसे परिवारों के लिए हर महीने अतिरिक्त ₹100 की राशि भी उनके घरेलू बजट पर असर डाल सकती है। कमरो ने सरकार से सवाल किया कि ग्रामीण जनता को राहत देने और उनकी आय बढ़ाने के उपायों के बजाय लगातार नए आर्थिक दायित्व क्यों बढ़ाए जा रहे हैं।
‘गरीब और किसान पर अतिरिक्त बोझ क्यों?’
गुलाब कमरो ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियां जनहित के बजाय जनविरोधी साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। खाद्य सामग्री, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों के बीच आम परिवार अपने सीमित संसाधनों में घर चला रहा है। ऐसे में भवन कर की वसूली ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक भार बन सकती है।
उन्होंने कहा कि “गांव का गरीब, किसान, मजदूर और राशन कार्डधारी परिवार आखिर कब तक नए-नए करों और बढ़ते खर्चों का बोझ उठाएगा?”
पूर्व विधायक ने सरकार से इस कथित कर वसूली के संबंध में स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण जनता को यह बताया जाना चाहिए कि भवन कर किस नियम, प्रावधान और प्रक्रिया के तहत वसूला जा रहा है तथा इसकी दर निर्धारित करने का आधार क्या है।
सचिवों पर कार्रवाई के निर्देश को लेकर भी सवाल
कमरो ने कर वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं होने पर ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों पर वसूली का दबाव बनाने के बजाय सरकार को यह देखना चाहिए कि ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक भार का क्या प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने मांग की कि यदि भवन कर वसूली के संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या निर्देश जारी किया गया है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि ग्रामीणों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके।
‘महंगाई की मार, ऊपर से नया कर’
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि ग्रामीण जनता पहले ही महंगाई, बिजली बिल और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। ऐसे समय में नए आर्थिक बोझ की बजाय सरकार को आम लोगों को राहत देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा—
“महंगाई की मार, ऊपर से नया कर!
ग्रामीण जनता पर आर्थिक प्रहार बंद करो।”
— गुलाब कमरो,
