छत्तीसगढ़ के लाखों सरकारी कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है कैशलेस इलाज की सौगात, अस्पतालों में नहीं देना होगा एक भी रुपया!

ई-हेल्थ कार्ड से सरकारी और निजी अस्पतालों में होगा मुफ्त कैशलेस उपचार; प्रदेश के 134 और दूसरे राज्यों के 64 निजी अस्पताल सूचीबद्ध, योजना पर सालाना 220 से 230 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

लोकेशन: मनेन्द्रगढ़

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छत्तीसगढ़ के लाखों सरकारी कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है कैशलेस इलाज की सौगात, अस्पतालों में नहीं देना होगा एक भी रुपया!

एमसीबी। छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ी राहत की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने पर कर्मचारियों को इलाज के लिए अस्पतालों में पहले अपनी जेब से पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे और न ही मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति के लिए महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे। पात्र कर्मचारी और उनके आश्रित परिवार के सदस्य मान्यता प्राप्त सरकारी एवं निजी अस्पतालों में ई-हेल्थ कार्ड के माध्यम से बिना अग्रिम भुगतान के उपचार करा सकेंगे।

29 जुलाई 2026 को तैयार किए गए कैशलेस उपचार सुविधा संबंधी प्रस्ताव में मौजूदा चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और सरल बनाने का खाका तैयार किया गया है। यह योजना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप लागू किए जाने के लिए प्रस्तावित है। हालांकि, अभी इसे प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसके वास्तविक क्रियान्वयन के लिए शासन की अंतिम स्वीकृति और दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है।

ई-हेल्थ कार्ड बनेगा इलाज का आधार, डिजिटल रिकॉर्ड से होगी पहचान

प्रस्तावित योजना के तहत पात्र शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों के ई-हेल्थ कार्ड बनाए जाएंगे। कर्मचारी की पात्रता का सत्यापन उसके कर्मचारी पहचान क्रमांक (Employee ID) तथा आश्रित सदस्यों के आधार कार्ड के माध्यम से किया जाएगा। संबंधित विभागाध्यक्ष कार्यालयों को पात्रता निर्धारित करने और सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

लाभार्थियों के पंजीयन और पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एनआईसी के सहयोग से बेनिफिशियरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (BIS) विकसित किया जाएगा। इसके जरिए कर्मचारियों और उनके परिवार के पात्र सदस्यों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे अस्पतालों में उनकी पहचान और उपचार की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।

अस्पताल में भर्ती से लेकर इलाज तक नहीं करना होगा अग्रिम भुगतान

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पात्र कर्मचारी और उनके आश्रित मान्यता प्राप्त अस्पतालों में ई-हेल्थ कार्ड के जरिए कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकेंगे। अस्पताल में पहुंचने पर लाभार्थी का बायोमेट्रिक अथवा निर्धारित डिजिटल माध्यम से प्रमाणीकरण किया जाएगा। इसके बाद संबंधित उपचार पैकेज के लिए प्री-अथॉराइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर अस्पताल इलाज शुरू कर सकेगा।

उपचार पूरा होने के बाद अस्पताल मरीज से संबंधित दस्तावेज और क्लेम ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) के माध्यम से क्लेम प्रस्तुत करेगा। टीपीए, चिकित्सा विशेषज्ञों अथवा निर्धारित जांच व्यवस्था के तहत क्लेम का परीक्षण किया जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद अस्पताल को सीधे भुगतान किया जाएगा।

इस व्यवस्था से कर्मचारियों को इलाज के दौरान बड़ी रकम जुटाने, कर्ज लेने या अपनी बचत खर्च करने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के 134 और दूसरे राज्यों के 64 निजी अस्पतालों को मान्यता

प्रस्ताव में मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों का भी उल्लेख किया गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 8 मई 2025 को जारी आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ में 134 और राज्य के बाहर 64 निजी अस्पतालों को मान्यता प्राप्त है।

योजना लागू होने के बाद पात्रता और निर्धारित मानकों के आधार पर नए अस्पतालों को भी पंजीकृत किया जा सकेगा। सरकारी अस्पतालों में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इससे कर्मचारियों को उपचार के लिए अस्पताल चुनने के अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

CGHS की दरों के आधार पर तय होगा इलाज का भुगतान

प्रस्तावित योजना में उपचार की दरें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के नियम-8 के अनुसार निर्धारित की जाएंगी। इसके लिए केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) की निर्धारित एवं समय-समय पर संशोधित पैकेज दरों को आधार बनाया जाएगा।

दिल्ली स्थित CGHS की संबंधित श्रेणी के शहरों के लिए निर्धारित दरों के अनुरूप भुगतान की व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं, किसी विशेष उपचार की दर उपलब्ध नहीं होने पर राज्य शासन नियमानुसार उसकी दर निर्धारित कर सकेगा।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर हर साल 220 से 230 करोड़ रुपये खर्च

प्रस्ताव में पिछले वर्षों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यय के आंकड़े भी दिए गए हैं, जो इस योजना की वित्तीय आवश्यकता को दर्शाते हैं।

वर्ष 2021-22 : 118.45 करोड़ रुपये

वर्ष 2022-23 : 177.06 करोड़ रुपये

वर्ष 2023-24 : 176.05 करोड़ रुपये

वर्ष 2024-25 : 225 करोड़ रुपये

वर्ष 2025-26 : 221 करोड़ रुपये (संभावित व्यय)

इन आंकड़ों के आधार पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति मद में राज्य शासन पर प्रतिवर्ष लगभग 220 से 230 करोड़ रुपये का वित्तीय भार अनुमानित किया गया है। इसके अलावा क्लेम प्रोसेसिंग, आईटी प्लेटफॉर्म और प्रशासनिक व्यवस्था के संचालन के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता बताई गई है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने का भी प्रस्ताव में उल्लेख है।

योजना के संचालन के लिए बनेगा अलग नोडल विभाग और विशेष सेल

कैशलेस चिकित्सा सुविधा के सुचारू संचालन के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवा संचालनालय के अंतर्गत एक पृथक सेल गठित किया जाएगा।

इस सेल में एक नोडल अधिकारी, तीन चिकित्सक, दो अकाउंट ऑफिसर, तीन आईटी मैनेजर/प्रोग्रामर, छह डेटा एंट्री ऑपरेटर और चार सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता बताई गई है। इसके अतिरिक्त क्लेम के परीक्षण और प्री-अथॉराइजेशन के लिए टीपीए तथा चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी।

शिकायतों के लिए कॉल सेंटर और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था

योजना में केवल इलाज की सुविधा ही नहीं, बल्कि शिकायतों के निराकरण और निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके लिए फ्री कॉल सेंटर और ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। कर्मचारी अथवा अस्पताल उपचार, भुगतान और तकनीकी समस्याओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।

क्लेम की जांच, मेडिकल ऑडिट, फील्ड ऑडिट, अस्पतालों के निरीक्षण और एआई आधारित टियर रिस्क प्रोफाइलिंग के जरिए संभावित अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी पर नियंत्रण रखने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।

पुरानी व्यवस्था से कैसे अलग होगी कैशलेस सुविधा?

वर्तमान व्यवस्था में शासकीय कर्मचारियों को इलाज के दौरान पहले स्वयं अस्पताल का भुगतान करना पड़ता है। इसके बाद बिल, उपचार संबंधी दस्तावेज और आवश्यक प्रमाणपत्र जमा कर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इस पूरी प्रक्रिया में कई बार कर्मचारियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

इसके विपरीत प्रस्तावित कैशलेस व्यवस्था में कर्मचारी को अस्पताल में अग्रिम भुगतान नहीं करना होगा। अस्पताल सीधे डिजिटल पोर्टल के माध्यम से क्लेम प्रस्तुत करेगा और निर्धारित जांच एवं स्वीकृति के बाद उसे भुगतान किया जाएगा।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार की प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा योजना प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इससे न केवल इलाज के दौरान आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति की लंबी प्रक्रिया से भी राहत मिलने की उम्मीद है। अब कर्मचारियों की नजर शासन की अंतिम मंजूरी, योजना लागू होने की तारीख और इसके विस्तृत दिशा-निर्देशों पर टिकी है।

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