मनेंद्रगढ़/एमसीबी। मनेंद्रगढ़–केल्हारी मार्ग पर 22 अक्टूबर को हुए दर्दनाक यात्री बस हादसे ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और यात्री सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुर्घटना में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से अधिक यात्री घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, बस में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, ओवरलोडिंग की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस भयावह हादसे के अगले ही दिन, 23 अक्टूबर को परिवहन विभाग की नींद टूटी और यात्री बसों के खिलाफ सघन जांच अभियान शुरू कर दिया गया। विभाग की इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है,क्या यात्री बसों की नियमित और सख्त जांच के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करना जरूरी है?
हादसे के बाद हरकत में आया विभाग, 3 बसें जब्त
जिला परिवहन अधिकारी के निर्देश पर परिवहन उड़नदस्ता दल ने 23 अक्टूबर को यात्री बसों की जांच की। जांच के दौरान मोटरयान अधिनियम एवं संबंधित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 3 यात्री बसों को जब्त किया गया, जबकि 4 अन्य बसों के विरुद्ध कुल 11 हजार रुपये की चालानी कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के ये आंकड़े अपने आप में सवाल खड़े करते हैं। यदि जांच के दौरान बसों में नियमों का उल्लंघन मिल रहा है, तो यह जानना भी जरूरी है कि दुर्घटना से पहले नियमित निरीक्षण कितनी गंभीरता से किया जा रहा था और यात्री सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
फिटनेस से लेकर ओवरलोडिंग तक होगी जांच
दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने यात्री बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों की तकनीकी स्थिति की जांच शुरू की है। इसके साथ ही ओवरलोडिंग और ओवरस्पीडिंग पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।
विभाग ने बस संचालकों को सभी दस्तावेज वैध रखने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

छह मौतों के बाद कार्रवाई, लेकिन जवाबदेही कौन तय करेगा?
यात्री बसों में सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना परिवहन व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। ऐसे में हादसे के बाद जांच अभियान चलाना जरूरी कदम जरूर है, लेकिन इससे पहले की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल खत्म नहीं होते।
छह लोगों की जान जाने और 37 से अधिक यात्रियों के घायल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई केवल हादसे के बाद की औपचारिकता बनकर रह जाएगी, या फिर बसों की नियमित जांच, ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक और नियम तोड़ने वाले संचालकों के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई भी सुनिश्चित होगी?
अब जरूरत केवल चालान काटने और बसें जब्त करने की नहीं, बल्कि ऐसी जवाबदेह व्यवस्था बनाने की है, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा हादसे के बाद नहीं, बल्कि हर दिन प्राथमिकता बने।
