‘नारी अबला नहीं, सबला है’ पंच परिवर्तन से सामाजिक बदलाव का संदेश, तेजस्विनी रानी लक्ष्मीबाई युवती सम्मेलन में गूंजा युवती शक्ति का संकल्प

सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य को बनाया परिवर्तन का आधार

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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‘नारी अबला नहीं, सबला है’ पंच परिवर्तन से सामाजिक बदलाव का संदेश, तेजस्विनी रानी लक्ष्मीबाई युवती सम्मेलन में गूंजा युवती शक्ति का संकल्प

बैकुंठपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) कोरिया द्वारा ‘तेजस्विनी रानी लक्ष्मीबाई युवती सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में ‘पंच परिवर्तन’ को केंद्र में रखते हुए समाज और राष्ट्र के निर्माण में युवतियों एवं युवाओं की भूमिका पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, ‘स्व’ आधारित जीवनशैली एवं स्वदेशी तथा नागरिक कर्तव्य को सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख आधार के रूप में रेखांकित किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि पंच परिवर्तन केवल भाषण अथवा विचार-विमर्श का विषय नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली जीवन-पद्धति है। व्यक्ति के आचरण में सकारात्मक बदलाव से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र में व्यापक परिवर्तन की नींव रखी जा सकती है। इसी उद्देश्य से सम्मेलन में उपस्थित युवाओं से अपने जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलावों की शुरुआत करने का आह्वान किया गया।

सामाजिक समरसता से मजबूत होगा समाज

सामाजिक समरसता के विषय पर जाति, भाषा, क्षेत्र और अन्य सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर बंधुत्व, समानता और परस्पर सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया। ‘एक मंदिर, एक जलस्रोत, एक श्मशान’ की भावना के माध्यम से सामाजिक एकता और समान व्यवहार का संदेश दिया गया। श्रीराम, शबरी और निषादराज के प्रसंगों के माध्यम से समरसता को केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी गई।

परिवार को बताया संस्कार और राष्ट्र निर्माण की पहली पाठशाला

कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत परिवार को संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण की पहली पाठशाला बताते हुए परिवार के सदस्यों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया। सप्ताह में कम से कम एक बार परिवार के साथ बैठकर भोजन करने, महापुरुषों के जीवन एवं विचारों पर चर्चा करने तथा बच्चों में संस्कार, नैतिक मूल्यों, बड़ों के सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।

आयुषी साहू बोलीं—‘नारी अबला नहीं, सबला है’

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अभाविप बैकुंठपुर नगर मंत्री आयुषी साहू ने कहा कि “नारी अबला नहीं, सबला है।” उन्होंने कहा कि नारी परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं को अपनी क्षमता और प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए आत्मनिर्भर बनने तथा समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए आगे आना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे कदम, बड़ा बदलाव

पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत जल संरक्षण, वृक्षारोपण और सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी जैसे व्यावहारिक उपायों को अपनाने की अपील की गई। प्रत्येक घर में कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लेने तथा प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हुए उसके संरक्षण का संदेश दिया गया।

स्वदेशी और ‘स्व’ आधारित जीवनशैली पर जोर

‘स्व’ आधारित जीवनशैली एवं स्वदेशी के विषय पर स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, स्थानीय रोजगार एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने तथा भारतीय भाषा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव की भावना विकसित करने पर बल दिया गया।

वहीं नागरिक कर्तव्य के अंतर्गत यातायात नियमों का पालन, स्वच्छता, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, कानून का सम्मान और अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया।

‘मैं क्या कर सकता/सकती हूं?’—आत्मचिंतन का दिया संदेश

सम्मेलन में युवाओं से आत्मचिंतन करते हुए स्वयं से “मैं क्या कर सकता/सकती हूं?” का प्रश्न पूछने और पंच परिवर्तन के किसी एक आयाम से तत्काल शुरुआत करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि परिवर्तन की शुरुआत किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि व्यक्ति के दैनिक व्यवहार में आने वाले छोटे-छोटे सकारात्मक बदलावों से होती है।

"कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित*

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोरिया जिला के सह जिला संघचालक नरेश सोनी, अभाविप जिला संगठन मंत्री अशोक यादव, जिला संयोजक बलबीर पुषाम, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संगीता सिंह, बैकुंठपुर नगर मंत्री आयुषी साहू, नगर सह मंत्री आकांक्षा सिंह, नगर कार्यकर्ता माही पंकज, नगर विद्यालय प्रमुख अमृता सिंह, कार्यकर्ता अलका सिंह, नगर सह मंत्री सिद्धार्थ साहू, सुयश यादव, रिया गुप्ता, नैना, अंकिता सिंह, आफरीन, रूपाली पड़वार, खुशी रजवाड़े, अनिल साहू, धर्मेंद्र यादव, विवेक पटेल, एनी काशी, महेश कौशिक सहित अन्य कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

सम्मेलन के समापन पर पंच परिवर्तन को केवल विचार तक सीमित न रखते हुए उसे दैनिक जीवन और आचरण का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति में सकारात्मक परिवर्तन से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र में व्यापक बदलाव की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है।

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