मनेन्द्रगढ़। राष्ट्रीय हिंदी दिवस पखवाड़े के अवसर पर ‘विकास के नए क्षितिज में हिंदी’ विषय पर नगर पालिका पार्क, मनेन्द्रगढ़ में संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान तथा बनमाली सृजन केंद्र, कोरिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं एवं रचनाकारों ने हिंदी के वर्तमान स्वरूप, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंचल के वरिष्ठ लेखक बीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या के सभी राज्यों के नागरिक जिस दिन हिंदी को मन से संपर्क भाषा के रूप में स्वीकार कर लेंगे, उस दिन हिंदी को वैश्विक स्तर पर अग्रणी भाषा बनने में अधिक समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि देश की सभी भाषाएं अपनी-अपनी समृद्ध विरासत रखती हैं, लेकिन हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में स्वीकार किए जाने से देश के विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के बीच संवाद और मजबूत हो सकता है।
संगोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए ज्योति मजूमदार ने कहा कि हिंदी को संविधान में राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, लेकिन पूरे देश में इसे राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किए जाने को लेकर अभी भी चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास और प्रसार का सफर समाज को मिलकर तय करना होगा।
कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार राजेश जैन ने किया। शिक्षा जगत से जुड़े संजय सेंगर एवं जसपाल सिंह ने हिंदी शिक्षा के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि विद्यालय चाहे किसी भी माध्यम का हो, हिंदी ऐसी भाषा है जो देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में तीन भाषा पद्धति हिंदी के प्रसार की दिशा में उपयोगी कदम साबित हो सकती है।
योग शिक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय ने कहा कि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से वैश्विक भाषाओं के साहित्य का हिंदी में अनुवाद उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे हिंदी पाठकों को विश्व साहित्य से जुड़ने का अवसर मिल रहा है और हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
अधिवक्ता श्याम बिहारी रैकवार ने हिंदी को कानून की भाषा के रूप में बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज भी बैंकिंग सहित कई क्षेत्रों के महत्वपूर्ण प्रपत्र अंग्रेजी में उपलब्ध होते हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि सरकारी एवं सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े दस्तावेज सरल हिंदी में उपलब्ध कराने की दिशा में और प्रयास किए जाने चाहिए।
व्याख्याता टी. विजय गोपाल राव ने अहिंदी भाषी राज्यों में हिंदी की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अनेक राज्यों में बच्चे और युवा हिंदी बोलने में गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने केरल में त्रिभाषा पद्धति के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय प्रतिनिधियों द्वारा हिंदी में अपनी बात रखने को उन्होंने हिंदी के वैश्विक विस्तार का सकारात्मक संकेत बताया।
कवि सम्मेलन में रचनाओं ने बांधा समां

कार्यक्रम के दूसरे चरण में मुख्य अतिथि राशिद कुरैशी एवं संस्था अध्यक्ष अनिल कुमार जैन की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें आंचलिक रचनाकारों ने अपनी कविताओं और गीतों की प्रस्तुति से श्रोताओं को देर शाम तक बांधे रखा।
रचनाकार जसपाल सिंह की हिंदी पर केंद्रित कविता
“हिंदी टूटी-फूटी ही सही, हर प्रांत में चल जाती है,
जिस जुबान पर पड़े, उसी जुबान में ढल जाती है।”
ने खूब तालियां बटोरीं।
वहीं गिरीश तिवारी की कविता “हिंदी का अभिवादन करना चाहे तो हाथ हमारे बौने क्यों हो जाते हैं” ने भी श्रोताओं की खूब वाहवाही हासिल की।
पत्रकार रामचरित द्विवेदी ने बेटी को समर्पित अपनी मार्मिक कविता के माध्यम से भावनात्मक माहौल बना दिया। उनकी पंक्तियां
“तू अचार छोड़ने की बात मत कर लाडो,

तू कहे तो मैं अचार की दुकान खोल दूं।”
पर श्रोताओं ने जमकर सराहना की।
नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाली वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र श्रीवास्तव की गीत प्रस्तुति
“हम जहां से चले तुम, वहीं हो खड़े,
थोड़ी कोशिश करोगे तो बढ़ जाओगे।”
ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया।
देर शाम तक चले इस साहित्यिक आयोजन में विजय गुप्ता, गिरीश तिवारी, वीरांगना श्रीवास्तव, संगीता तिवारी, सतीश उपाध्याय, जसपाल सिंह कालरा, ज्योति मजूमदार एवं पुष्कर लाल तिवारी सहित अन्य रचनाकारों ने गीत और कविताओं की प्रस्तुति दी, जिसका उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम में अधिवक्ता श्याम बिहारी रैकवार, संजय सेंगर, राशिद कुरैशी, अनिल कुमार जैन, संबोधन संस्था के वरिष्ठ सदस्य निरंजन मित्तल, टी. विजय गोपाल राव एवं वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। आयोजन ने हिंदी भाषा, साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति को लेकर शहर में एक सार्थक संवाद का वातावरण तैयार किया।
