खेत से डिजिटल रिकॉर्ड तक: कलेक्टर ने परखी डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जमीनी हकीकत

कुरकुटी में खेत पहुंचकर फसल और रकबे का कराया सत्यापन, अधिकारियों को सटीक एवं पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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Aug 27, 20263 min read63 views
खेत से डिजिटल रिकॉर्ड तक: कलेक्टर ने परखी डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जमीनी हकीकत

एमसीबी/27 अगस्त 2026। जिले में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने के उद्देश्य से डिजिटल फसल सर्वेक्षण का कार्य तेजी से जारी है। खेत में वास्तव में कौन-सी फसल बोई गई है, उसका कितना रकबा है और भूमि का उपयोग किस रूप में हो रहा है,इन सभी जानकारियों को डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया की जमीनी हकीकत परखने कलेक्टर संतन देवी जांगड़े भरतपुर विकासखंड के ग्राम कुरकुटी पहुंचीं और मौके पर डिजिटल फसल सर्वेक्षण का निरीक्षण किया।

कलेक्टर के साथ अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार, एसडीएम एस. शेखर मिश्रा, तहसीलदार नीरज कांत तिवारी, पटवारी, संबंधित राजस्व अमला और ग्रामीण उपस्थित रहे। टीम ने ग्राम कुरकुटी में खसरा नंबर 133, कुल रकबा 0.65 हेक्टेयर, में किए जा रहे डिजिटल फसल सर्वेक्षण का मौके पर अवलोकन किया।

इस दौरान किसान रामबाई, पिता बिसाहू सहित अन्य 15 व्यक्तियों के खसरों में दर्ज भूमि उपयोग एवं फसल संबंधी जानकारी का स्थल पर सत्यापन किया गया। निरीक्षण में खसरा नंबर 133 के कुल रकबे में आवास गृह एवं बाड़ी 0.05 हेक्टेयर, पड़त भूमि 0.06 हेक्टेयर, मक्का 0.20 हेक्टेयर तथा उड़द 0.34 हेक्टेयर दर्ज होने की जानकारी का परीक्षण किया गया।

अधिकारियों ने खेत में पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति, भूमि उपयोग और डिजिटल माध्यम से दर्ज की जा रही जानकारी का बारीकी से मिलान किया। इस दौरान सर्वेक्षण प्रक्रिया में आने वाली व्यवहारिक स्थितियों की भी जानकारी ली गई।

वास्तविक स्थिति और डिजिटल रिकॉर्ड में हो समानता

कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने संबंधित अधिकारियों एवं मैदानी अमले को निर्देश दिए कि डिजिटल फसल सर्वेक्षण में सटीकता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि खेत में वास्तविक रूप से बोई गई फसल, भूमि का रकबा और भूमि उपयोग की स्थिति का मौके पर सही ढंग से सत्यापन करने के बाद ही जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जाए।

उन्होंने सर्वेक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना को न्यूनतम रखने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मैदानी अमले से कहा कि सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी वास्तविक स्थिति का सही प्रतिनिधित्व करे, ताकि तैयार होने वाला डिजिटल डाटा भविष्य में विश्वसनीय आधार बन सके।

खेत से डिजिटल रिकॉर्ड तक: कलेक्टर ने परखी डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जमीनी हकीकत (2)

किसानों के लिए भी उपयोगी होगा डिजिटल डाटा

डिजिटल फसल सर्वेक्षण के माध्यम से जिले में फसलों का वास्तविक, अद्यतन और प्रमाणिक डाटा तैयार किया जा सकेगा। यह आंकड़े कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल क्षति के आकलन तथा किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ पहुंचाने में उपयोगी साबित होंगे।

इसके अलावा डिजिटल आंकड़ों के आधार पर जिले में कृषि क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को समझने और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में प्रशासन को सहायता मिलेगी।

कलेक्टर ने कहा कि डिजिटल फसल सर्वेक्षण केवल आंकड़े दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सही और प्रमाणिक आंकड़ों से शासन की योजनाओं का बेहतर नियोजन और उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

निरीक्षण के दौरान संबंधित राजस्व अधिकारी-कर्मचारी एवं मैदानी अमला उपस्थित रहा।

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