एमसीबी, 20 अगस्त 2026। संभावित बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को परखने के उद्देश्य से तहसील नागपुर अंतर्गत हसदेव नदी इंटेकवेल एवं ग्राम पंचायत लाई स्थित वन विभाग नर्सरी परिसर में बाढ़ आपदा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभ्यास में बाढ़ की काल्पनिक स्थिति निर्मित कर राहत एवं बचाव कार्यों की पूरी प्रक्रिया को मौके पर जीवंत रूप से प्रदर्शित किया गया।
मॉकड्रिल के दौरान एसडीआरएफ की टीमों ने नदी के टापू में फंसे ग्रामीणों, तेज बहाव में फंसे व्यक्तियों, पेड़ों की डालियों तथा पुल पर फंसे लोगों को मोटर बोट, रेस्क्यू रस्सियों और अन्य आधुनिक उपकरणों की सहायता से सुरक्षित निकालने का प्रदर्शन किया। इसके अलावा बाढ़ में ढहे मकान में दबे लोगों के रेस्क्यू तथा सर्पदंश पीड़ित को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया।
टेबल टॉप एक्सरसाइज के बाद हुआ मैदानी परीक्षण
बाढ़ आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए 18 अगस्त 2026 को टेबल टॉप एक्सरसाइज (TTEX) आयोजित की गई थी। इसके बाद मैदानी मॉक एक्सरसाइज के माध्यम से प्रशासन एवं विभिन्न विभागों की वास्तविक परिस्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमता, उपलब्ध संसाधनों, आपसी समन्वय, राहत-बचाव व्यवस्था और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण किया गया।
अभ्यास के दौरान बाढ़ की सूचना मिलने से लेकर सूचना तंत्र सक्रिय करने, इंसिडेंट कमांडर द्वारा निर्णय लेने, बचाव दलों की तैनाती और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को परखा गया। एसडीएम लिंगराज सिदार को इंसिडेंट कमांडर, डिप्टी कलेक्टर विजयेंद्र सारथी एवं शशि शेखर मिश्रा को सहायक इंसिडेंट कमांडर तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
टापू से पुल तक, हर चुनौती का किया अभ्यास
मॉकड्रिल की शुरुआत हसदेव नदी के टापू पर बाढ़ के पानी के बीच फंसे ग्रामीणों के रेस्क्यू से हुई। प्रशिक्षित बचाव दल मोटर बोट और सुरक्षा उपकरणों के साथ प्रभावित लोगों तक पहुंचे और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का प्रदर्शन किया।
इसके बाद तेज बहाव में फंसे व्यक्तियों को बचाने की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई। रेस्क्यू टीम ने लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, रेस्क्यू रस्सियों और मोटर बोट की मदद से प्रभावित लोगों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाने की तकनीक दिखाई। पेड़ों की डालियों और पुल पर फंसे लोगों को निकालने की कार्रवाई का भी जीवंत प्रदर्शन किया गया।
बाढ़ से ढहे मकान में दबे लोगों को निकालने तथा सर्पदंश पीड़ित को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया के माध्यम से यह परखा गया कि एक साथ उत्पन्न होने वाली विभिन्न आपदा परिस्थितियों में राहत एवं बचाव दल कितनी तेजी और समन्वय के साथ कार्रवाई कर सकते हैं।
आधुनिक उपकरणों से हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
एसडीआरएफ की टीमों ने मॉकड्रिल के दौरान आधुनिक बचाव तकनीकों एवं उपकरणों का प्रदर्शन किया। मोटर बोट, स्कूबा डाइविंग उपकरण, अंडरवाटर कैमरा, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, पेलिकन लाइट, सर्च लाइट और फायर ब्रिगेड सहित विभिन्न संसाधनों का उपयोग किया गया।
प्रशिक्षित बचाव दल ने नदी के गहरे पानी में डूबे अथवा लापता व्यक्तियों की तलाश कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीक का प्रदर्शन किया। अंडरवाटर कैमरे के माध्यम से पानी के भीतर खोज अभियान की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई, जिससे आपात स्थिति में आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग की जानकारी सामने आई।
ग्रामीणों को बताया—आपदा में सूझबूझ भी बन सकती है जीवनरक्षक
मॉकड्रिल में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता के साथ उन्हें बाढ़ जैसी आपदा के समय स्वयं की सुरक्षा के व्यवहारिक उपायों की जानकारी दी गई। बचाव दल ने बताया कि आपात स्थिति में रेस्क्यू टीम अथवा नाव पहुंचने में समय लगने पर घर में उपलब्ध ड्रम, टीपा, भगोना, मटका और ट्यूब जैसी वस्तुओं का सुरक्षित तरीके से अस्थायी तैरने के साधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
अभ्यास का उद्देश्य ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाना और यह संदेश देना रहा कि आपदा के समय प्रशासन एवं बचाव दलों की सहायता के साथ सतर्कता, सही जानकारी और सूझबूझ भी जीवन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रेस्क्यू के साथ राहत शिविर और प्रशासनिक व्यवस्था की भी जांच
मॉकड्रिल के दौरान केवल नदी में बचाव अभियान का ही परीक्षण नहीं किया गया, बल्कि आपदा प्रबंधन की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को भी मौके पर परखा गया। स्टेजिंग एरिया, इंसिडेंट कमांड पोस्ट, बाढ़ नियंत्रण सूचना कक्ष, गुमशुदगी केंद्र और पुलिस सहायता केंद्र की व्यवस्थाओं का अभ्यास किया गया।
राहत शिविर में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, शौचालय, सुरक्षा और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था का भी परीक्षण किया गया। रिस्पॉन्डर कैंप में एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, लाइफ गार्ड, पुलिस और मेडिकल टीम की तैनाती तथा उनके बीच समन्वय की स्थिति को भी परखा गया।
कलेक्टर ने कहा—आपदा से पहले की तैयारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी संतन देवी जांगड़े ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। समय पर सूचना, त्वरित निर्णय, प्रशिक्षित बचाव दल और सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मॉकड्रिल का उद्देश्य जिले की आपदा प्रबंधन तैयारियों को जमीनी स्तर पर परखना और संभावित कमियों को वास्तविक आपदा आने से पहले दूर करना है। इस तरह के अभ्यास से यह पता चलता है कि आपदा की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से सक्रिय होते हैं और उपलब्ध संसाधनों का किस प्रकार प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
कलेक्टर ने राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, वन, परिवहन, खाद्य, नगरीय निकाय, शिक्षा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित सभी विभागों को आपदा की स्थिति में अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने तथा तैयारियों को लगातार मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए।
हर विभाग ने निभाई अपनी भूमिका
मॉकड्रिल में विभिन्न विभागों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का अभ्यास किया। राजस्व विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों एवं लोगों के आकलन तथा सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया परखी। स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक उपचार, मेडिकल टीम की तैनाती और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था का परीक्षण किया।
पुलिस विभाग ने सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, यातायात एवं भीड़ नियंत्रण की भूमिका निभाई। परिवहन विभाग ने प्रभावित लोगों तथा राहत सामग्री के परिवहन की व्यवस्था का अभ्यास किया। खाद्य विभाग ने राहत शिविरों में खाद्य सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण की प्रक्रिया परखी।
नगरीय निकाय ने स्वच्छता, पेयजल, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था की तैयारियों का परीक्षण किया, जबकि शिक्षा विभाग ने आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय भवनों को राहत शिविर के रूप में उपयोग करने की तैयारी का अभ्यास किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित जलस्रोतों के आकलन की प्रक्रिया प्रदर्शित की।
नागरिकों और एनसीसी विद्यार्थियों ने भी लिया प्रशिक्षण
मॉकड्रिल में एनसीसी विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भी सहभागिता की। नागरिकों ने राहत एवं बचाव की विभिन्न गतिविधियों को करीब से देखा तथा बाढ़ के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशासन एवं बचाव दलों ने नागरिकों से अपील की कि बाढ़ जैसी स्थिति में घबराने के बजाय सतर्क रहें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, सुरक्षित स्थानों की ओर जाएं और अफवाहों से बचें।
समन्वित तैयारी से मजबूत हुआ आपदा प्रबंधन तंत्र
हसदेव नदी में आयोजित यह मॉकड्रिल जिले की बाढ़ आपदा तैयारियों को परखने की दिशा में महत्वपूर्ण अभ्यास साबित हुआ। सूचना तंत्र के सक्रिय होने से लेकर इंसिडेंट कमांड पोस्ट, रेस्क्यू ऑपरेशन, चिकित्सा सहायता, राहत शिविर, खाद्य एवं पेयजल व्यवस्था, सुरक्षा और प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी तक पूरी व्यवस्था का मैदानी परीक्षण किया गया।
मॉकड्रिल ने यह संदेश स्पष्ट किया कि आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच हैं। जिला प्रशासन ने इस अभ्यास के माध्यम से संभावित बाढ़ की स्थिति में जनजीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा के लिए अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
