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एक जनवरी से प्रदेश के सभी अस्पतालों को डिजिटल बनाने का लक्ष्य, मिशन मोड में जुटा स्वास्थ्य विभाग

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दिए निर्देश; छत्तीसगढ़ में 2.63 करोड़ ABHA, 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थान डिजिटल नेटवर्क से जुड़े

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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Aug 19, 20266 min read35 views
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एमसीबी, 19 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक आधारित, पारदर्शी और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने डिजिटल हेल्थ सिस्टम को तेजी से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की मॉडल डिस्ट्रिक्ट इनिशिएटिव कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया। इस दौरान प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान प्रगति, उपलब्धियों और आगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों-कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि एक जनवरी से राज्य के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक से अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लक्ष्य के साथ मिशन मोड में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ स्वास्थ्य विभाग में नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। डिजिटल व्यवस्था से न केवल विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग, मरीजों के रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता आएगी।

2.63 करोड़ नागरिकों के बनाए जा चुके हैं ABHA

कार्यशाला में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का सबसे नागरिक-केंद्रित हिस्सा ABHA यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट है। इसके माध्यम से नागरिक अपनी जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन, उपचार संबंधी जानकारी और अन्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर नागरिक की सहमति के आधार पर इन रिकॉर्ड को संबंधित चिकित्सक अथवा स्वास्थ्य संस्था के साथ साझा किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 2.63 करोड़ नागरिकों के ABHA बनाए जा चुके हैं, जो प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों की भी डिजिटल पहचान

कार्यशाला में बताया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने के लिए हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 34 हजार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर HPR से जुड़ चुके हैं।

इसी तरह हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) के माध्यम से अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, ब्लड बैंक सहित 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। इससे स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्य पेशेवरों की प्रमाणित डिजिटल पहचान तैयार होने के साथ सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय की संभावना बढ़ेगी।

पंजीयन से डिस्चार्ज तक डिजिटल होगा मरीज का रिकॉर्ड

कार्यशाला में ABDM-सक्षम HMIS (हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इसके माध्यम से मरीज के अस्पताल पहुंचने से लेकर पंजीयन, जांच, उपचार और डिस्चार्ज तक की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जा सकेगी।

इस व्यवस्था से मरीजों के पुराने रिकॉर्ड तक पहुंच आसान होगी। साथ ही मेडिकल रिकॉर्ड की जांच, आयुष्मान योजना के क्लेम की प्रक्रिया, ऑडिट और वेरिफिकेशन को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होने से समय की बचत और विभागीय कार्यक्षमता में वृद्धि की उम्मीद है।

निजी अस्पतालों के डेटा को जोड़ना भी जरूरी : जायसवाल

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों से भी स्वास्थ्य संबंधी डेटा का आवश्यक समन्वय और साझाकरण जरूरी है, ताकि मरीज के इलाज का रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जुड़ सके।

उन्होंने कहा कि विभाग लगातार इस दिशा में काम कर रहा है और अधिकारी-कर्मचारी भी पूरी गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि मरीजों के इलाज से संबंधित अधिक से अधिक जानकारी ABHA से लिंक हो, जिससे भविष्य में मरीज को अपने स्वास्थ्य इतिहास के लिए अलग-अलग अस्पतालों में दस्तावेज लेकर भटकना न पड़े।

आयुष्मान कार्ड में शामिल की गई ABHA ID

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के नए कार्ड में ABHA ID को शामिल किया गया है। इससे लाभार्थियों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित और सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि अटल आरोग्य लैब की जांच रिपोर्ट अब सीधे मरीज के मोबाइल पर भेजी जा रही है, जिससे मरीजों को रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से अस्पताल अथवा जांच केंद्र के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसे हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा।

गांव, गरीब और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे डिजिटल स्वास्थ्य सेवा

छत्तीसगढ़ के बड़े भौगोलिक क्षेत्र और अनेक दुर्गम एवं ग्रामीण क्षेत्रों को देखते हुए कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख अस्पतालों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

स्वास्थ्य व्यवस्था का डिजिटल विस्तार इस तरह किया जाना है कि गांव, गरीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी इसका लाभ मिल सके। दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन सेवाओं और बेहतर स्वास्थ्य सूचना तंत्र के माध्यम से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।

डेटा की सुरक्षा और मरीज की सहमति सर्वोच्च प्राथमिकता

कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि ABDM केवल तकनीकी या IT परियोजना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के पूरे तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम है। मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और सहमति-आधारित उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग मरीज की अनुमति और निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप किया जाए, ताकि तकनीक के साथ-साथ नागरिकों का विश्वास भी कायम रहे।

सात प्रमुख लक्ष्यों पर आगे बढ़ेगा मिशन

कार्यशाला में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सात प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की गईं। इनमें शेष स्वास्थ्य संस्थानों को HFR से जोड़ना, अधिक से अधिक डॉक्टरों एवं नर्सिंग सहित स्वास्थ्य पेशेवरों को HPR से जोड़ना, ABHA के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना, HMIS का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, डिजिटल रिकॉर्ड की गुणवत्ता बेहतर करना, सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत करना तथा ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विभाग का लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जो सरल, तेज, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और मरीज के पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जुड़ी हुई हो। एक जनवरी से सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के लक्ष्य की दिशा में मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है और इस दिशा में राज्य काफी हद तक सफलता प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, एनएचए भारत सरकार के संचालक विक्रम पगारिया, राज्य स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त-सह-संचालक संजीव झा सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यशाला में डिजिटल हेल्थ मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी समन्वय और आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

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