रायपुर, 9 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न (प्रशिक्षु) डॉक्टरों द्वारा स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने अपना समर्थन दिया है। अभाविप ने राज्य सरकार से मांग की है कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए अन्य राज्यों में दिए जा रहे स्टाइपेंड का अध्ययन किया जाए तथा छत्तीसगढ़ में भी उन्हें उनके कार्य, जिम्मेदारियों और कार्यभार के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड प्रदान किया जाए।
प्रदेश के विभिन्न शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, सिम्स बिलासपुर, रायगढ़ सहित प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी इंटर्न डॉक्टरों द्वारा विरोध दर्ज कराया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों, कार्य की प्रकृति और अस्पतालों में निभाई जा रही भूमिका के अनुपात में काफी कम है।
इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान डॉक्टर काली पट्टी बांधकर अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करते रहे। मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया है।
अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका
अभाविप का कहना है कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में प्रशिक्षण के साथ-साथ मरीजों की देखभाल और चिकित्सकीय कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है और कई बार उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी कार्य करना पड़ता है। ऐसे में उनके कार्य एवं जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उचित स्टाइपेंड दिया जाना आवश्यक है।
अभाविप प्रदेश मंत्री अनंत सोनी ने कहा कि एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि वे अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे कठिन परिस्थितियों में मरीजों की सेवा करते हुए अपने चिकित्सकीय दायित्वों का निर्वहन करते हैं। वर्तमान स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और कार्यभार के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि अभाविप इंटर्न डॉक्टरों की जायज मांग का पूर्ण समर्थन करती है। सरकार को अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को दिए जा रहे स्टाइपेंड का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी सम्मानजनक एवं उचित स्टाइपेंड सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले में सकारात्मक पहल करते हुए इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल संवाद स्थापित किया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए।
अन्य राज्यों की तुलना में स्टाइपेंड कम होने का दावा
अभाविप के अनुसार, छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को वर्तमान में ₹15,900 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। संगठन का दावा है कि इसके मुकाबले ओडिशा में लगभग ₹44,000, पश्चिम बंगाल में ₹43,000 और झारखंड में करीब ₹25,000 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए अभाविप ने कहा कि पड़ोसी एवं अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड काफी कम है, जिसके कारण लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
सरकार से संवाद के जरिए समाधान की अपील
अभाविप ने कहा कि छात्र एवं युवा वर्ग से जुड़े विषयों पर सरकार का संवेदनशील और सकारात्मक रवैया आवश्यक है। इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग शासन के समक्ष रखते आ रहे हैं। ऐसे में उनकी मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
संगठन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल का असर न पड़े, इसके लिए सरकार को जल्द से जल्द पहल करनी चाहिए। इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से जहां उन्हें राहत मिलेगी, वहीं चिकित्सा व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड की समीक्षा कर उसे अन्य राज्यों के अनुरूप उचित एवं सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए। साथ ही सरकार इंटर्न डॉक्टरों के साथ तत्काल संवाद स्थापित कर उनकी जायज मांगों का समाधान करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में प्रभावी पहल करे।
