मनेंद्रगढ़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल (डी.डब्ल्यू.पी.एस.), मनेंद्रगढ़ में विशेष प्रार्थना सभा का गरिमामय एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला, परंपराओं, प्रकृति के प्रति आत्मीय लगाव तथा सामुदायिक जीवन की विशिष्ट विशेषताओं से परिचित कराना था। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति की विविधता के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता और ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात कक्षा नवमी की छात्रा दीपांशी केवट ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने आदिवासी समाज की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं, लोकजीवन, रीति-रिवाजों और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र निर्माण में आदिवासी समुदायों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने वाली समृद्ध जीवन-दृष्टि का प्रतीक है।
लोकनृत्य की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक एवं मनमोहक पक्ष कक्षा आठवीं के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया आदिवासी लोकनृत्य रहा। पारंपरिक लय, ताल, भाव-भंगिमाओं और सामूहिक प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति की जीवंतता, उल्लास और सामुदायिक भावना को मंच पर साकार कर दिया। पारंपरिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती इस प्रस्तुति ने विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का वातावरण बना दिया। विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति पर उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
आदिवासी संस्कृति भारतीय विरासत का गौरवपूर्ण अध्याय : अश्वनी वर्मा
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री अश्वनी वर्मा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति भारत की बहुरंगी एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता, सहयोग और संतुलित जीवन के अनेक महत्वपूर्ण संदेश निहित हैं। विद्यार्थियों को इन मूल्यों से प्रेरणा लेते हुए प्रकृति संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और अपनी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर समाज और संस्कृति को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे उनमें विभिन्न समुदायों की परंपराओं और जीवनशैली के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।
विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति : पूनम सिंह
विद्यालय की निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराकर उन्हें संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक विविधता में निहित है। देश के प्रत्येक समुदाय की भाषा, कला, लोकपरंपरा, वेशभूषा और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सभी संस्कृतियों के प्रति सम्मान की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने आदिवासी संस्कृति के सम्मान, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ राज्यगीत एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह विशेष प्रार्थना सभा विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संस्कृति, कला और संवेदना का सुंदर संगम साबित हुई। आयोजन ने न केवल आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराया, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता की भावना को भी मजबूत किया।
