मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एम.सी.बी.)
5 अगस्त : जिले में आदिवासी विकास विभाग द्वारा छात्रावास एवं आश्रम अधीक्षकों के अतिरिक्त प्रभार आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति (कृषि स्थाई समिति) सुखमंती सिंह ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
*सचिवालय के निर्देशों और नियमों की अनदेखी*
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में सुखमंती सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 में जारी सचिवालयीन निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख था कि नियमित अधीक्षक उपलब्ध न होने पर स्थानीय या निकटस्थ संस्था के पात्र शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए। इसके बावजूद दूरस्थ विद्यालयों के शिक्षकों को प्रभार सौंप दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल शालाओं में भेजा गया था, लेकिन सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग) द्वारा पुनः गैर-नियमानुसार अतिरिक्त प्रभार देकर पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया गया है।
*स्थानीय व नियमित अधीक्षकों को दरकिनार करने के प्रमुख उदाहरण*
*पत्र में प्रभार आवंटन में की गई गड़बड़ियों के कई उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं:
मनेंद्रगढ़ विकासखंड: बेलबहरा छात्रावास का प्रभार भलौर के शिक्षक को दिया गया, जबकि स्थानीय शिक्षकों की उपेक्षा की गई। वहीं मनेंद्रगढ़ छात्रावास का प्रभार परसगढ़ी के शिक्षक को दिया गया, जबकि उसी भवन में नियमित अधीक्षक पदस्थ हैं।
केल्हारी व खड़गवां क्षेत्र: केल्हारी में 25 किमी दूर कपूरिया के शिक्षक को प्रभार मिला, जबकि पास में नियमित अधीक्षक उपलब्ध थे। खड़गवां के जर्राधा छात्रावास का प्रभार नियमित अधीक्षक के बजाय सहायक शिक्षक को सौंप दिया गया।
भरतपुर व चिरमिरी विकासखंड: जनकपुर कन्या छात्रावास का प्रभार 6-7 किमी दूर की शिक्षिका को दिया गया, जबकि स्थानीय स्तर पर नियमित अधीक्षिका मौजूद थीं। कुंवारपुर में भी 8 किमी दूर के शिक्षक को प्रभार दिया गया।
बड़गांवकला का मामला: वर्ष 2025 में नियुक्त नियमित अधीक्षक को बिना सक्षम आदेश के कार्यालय में संलग्न कर दिया गया और उनके स्थान पर दूसरे शिक्षक को प्रभार दे दिया गया।
शिक्षा विभाग से समन्वय का अभाव
आप नेता ने आरोप लगाया कि प्रभार सूची तैयार करते समय विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO), संकुल प्रभारियों तथा संबंधित शिक्षा अधिकारियों से आवश्यक सहमति या अनुशंसा नहीं ली गई। यदि दोनों विभागों के बीच समन्वय होता तो स्थानीय शिक्षकों को प्राथमिकता मिलती और व्यवस्था सुचारू रहती।
प्रमुख मांगें
सुखमंती सिंह एवं आम आदमी पार्टी भरतपुर इकाई ने कलेक्टर से निम्नलिखित मांगें की हैं:
वर्ष 2025 में जारी प्रभार संबंधी सभी आदेशों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
नियमों की अवहेलना और पक्षपात करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही हो।
भविष्य में अतिरिक्त प्रभार देते समय स्थानीय एवं नियमित अधीक्षकों को ही प्राथमिकता दी जाए ताकि छात्रों की शिक्षा और छात्रावास प्रबंधन प्रभावित न हो।
