मनेंद्रगढ़। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), बैकुंठपुर जिला कोरिया (छत्तीसगढ़) के तत्वावधान में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशानुसार मंगलवार 4 अगस्त 2026 को मनेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के सहयोग से विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य यात्रियों, महिलाओं एवं बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर (PLV) अंजनी यादव ने महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण, बाल अधिकारों तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं महिला हेल्पलाइन 181 के उपयोग और आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया।
वहीं, पीएलवी अजय विश्वकर्मा ने बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने की अपील की।
कार्यक्रम में रेलवे सुरक्षा बल के निरीक्षक बी.के. चौधरी एवं उप निरीक्षक अर्जुन सिंह ने मानव तस्करी की रोकथाम पर विशेष जानकारी साझा की। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यदि किसी नाबालिग या संदिग्ध परिस्थिति में किसी व्यक्ति को देखें तो तुरंत रेलवे सुरक्षा बल या संबंधित एजेंसियों को सूचना दें। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते किसी एक भी नाबालिग को सुरक्षित बचाया जा सके, तो यह समाज के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
शिविर में रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी सुशील कुमार सहित अन्य सुरक्षा अधिकारियों की उपस्थिति रही। इस दौरान लगभग 35 यात्रियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर कानूनी एवं सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
जागरूकता कार्यक्रम के बाद सामने आया संवेदनशील मामला
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक नाबालिग बालिका ने साहस जुटाकर अपनी समस्या विधिक साक्षरता टीम के समक्ष रखी। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालिका बिलासपुर की निवासी है और रात 11 बजे आने वाली ट्रेन का इंतजार सुबह 11 बजे से रेलवे स्टेशन पर कर रही थी। उसकी स्थिति को देखते हुए सुरक्षा एवं संरक्षण के दृष्टिकोण से तत्काल रेलवे सुरक्षा बल कार्यालय में सुरक्षित बैठाकर उसकी काउंसलिंग की गई।
इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल अधिकारियों ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से संपर्क किया। सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन की केस वर्कर टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बालिका को सुरक्षित संरक्षण एवं आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित किया कि विधिक जागरूकता अभियान केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर हस्तक्षेप कर जरूरतमंद बच्चों एवं महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
