मनेन्द्रगढ़। पतंजलि योग समिति द्वारा गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक गरिमामय गुरु सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, योग एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले गुरुओं और योग साधकों का शाल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न एवं मिष्ठान भेंट कर सम्मान किया गया। समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के संरक्षण का संदेश देते हुए वक्ताओं ने गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ सेवानिवृत्त प्राचार्य मुन्नालाल श्रीवास्तव ने कहा कि जीवन मूल्यों को समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुरु स्वयं दीपक की भांति प्रकाशित होकर अपने शिष्यों के जीवन को ज्ञान, संस्कार और सदाचार के प्रकाश से आलोकित करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी बोध कराते हैं।
समारोह में वरिष्ठ प्राचार्य एम.एल. श्रीवास्तव का पतंजलि योग समिति की ओर से शाल, श्रीफल एवं मिष्ठान भेंट कर सम्मान किया गया। वहीं वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय एवं विवेक कुमार तिवारी को भी उनके योग एवं सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। तेजस्विनी शाखा, मारवाड़ी युवा मंच की अध्यक्ष अनीता फरमानिया ने श्रीमती बलबीर कौर को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
विद्यालय शिक्षा विभाग से जुड़े योग साधकों मनीष कुमार गुप्ता, दिवाकर आचार्य, विनोद कुमार सोनी एवं नीलम दुबे को भी योग एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पतंजलि योग समिति के विभिन्न आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण निशि, मनीष कुमार गुप्ता, विनोद कुमार सोनी, सुशील कुमार गुप्ता (पिंटू) तथा भैरव केसरवानी की उत्कृष्ट सहभागिता की भी सराहना की गई।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का आध्यात्मिक उत्सव है। यह महर्षि भगवान वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है। सनातन परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान सर्वोच्च स्थान दिया गया है, क्योंकि वही शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण कर उसे जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बनाते हुए वी क्लब की अध्यक्षा बबीता अग्रवाल एवं कल्पना सिंह राजपूत ने गुरु वंदना प्रस्तुत की तथा गुरु की महिमा पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी परंपराओं में से एक है और यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहनी चाहिए।
समारोह के दौरान उपस्थित योग साधकों एवं अतिथियों ने गुरुओं का चंदन तिलक लगाकर, शाल एवं सम्मान स्वरूप भेंट देकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट की। इस अवसर पर कैलाश दुबे, आर.डी. दीवान, कुंवर सिंह राजपूत, आर्य डेविड, पिंकी सलूजा, जगदंबा अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, सुशील कुमार गुप्ता, नीलू सिंह, श्रीमती संजू सहित बड़ी संख्या में योग साधक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में बलबीर कौर ने सभी अतिथियों, योग साधकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा जैसे आयोजन समाज में संस्कार, सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।
