मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी)। जिले में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हुई संविदा भर्तियों में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल विकास विभाग) तथा कलेक्टर, एमसीबी को पुनः स्मरण पत्र भेजते हुए तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी के कार्यकाल में संपन्न हुई संविदा नियुक्तियों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
पूर्व विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उन्होंने लगभग दस माह पूर्व भी इस संबंध में शिकायत प्रस्तुत की थी, किंतु अब तक कोई ठोस या सख्त कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच की जाती तो भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे संदेह दूर किए जा सकते थे।
गुलाब कमरो ने शिकायत एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कथित अनियमितताओं से प्रभावित संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर नियमों के अनुरूप पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से पुनः भर्ती कराने की भी मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि तत्कालीन नियुक्तिकर्ता अधिकारी अथवा अन्य संबंधित अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पूर्व विधायक ने जिन भर्तियों की जांच की मांग उठाई है, उनमें मिशन वात्सल्य के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति की संविदा भर्ती, मिशन वात्सल्य के तहत संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन की राज्य एवं जिला स्तरीय संविदा नियुक्तियां, मिशन शक्ति के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण केंद्र के संचालन के लिए हुई संविदा भर्ती, महिला संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति तथा सखी वन स्टॉप सेंटर के संचालन हेतु सेवा प्रदाताओं की भर्ती शामिल हैं।
गुलाब कमरो का कहना है कि सरकारी योजनाओं में होने वाली संविदा नियुक्तियां पूरी तरह योग्यता, पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो और योग्य अभ्यर्थियों का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था पर बना रहे।
पूर्व विधायक ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र जांच प्रारंभ की जाए, दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमसम्मत ढंग से पुनः संपन्न कराया जाए।
