एमसीबी 20 जुलाई : जिला स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में पदस्थ एक पूर्व महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अपनी सफाई देते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है।
क्या है पूरा मामला?
स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि संबंधित महिला वर्ष 2006 में एक गर्भवती महिला को गलत इंजेक्शन लगाने के मामले की आरोपी थी, जिससे मरीज की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में आपराधिक प्रकरण चलने के बाद वर्ष 2016 में कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई थी। कोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन CMHO बैकुंठपुर द्वारा नियमानुसार उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
भुगतान में नियम और तकनीकी अड़चन
महिला कर्मचारी द्वारा बर्खास्तगी के बाद अपने स्वत्वों (एरियर/भुगतान) की मांग की जा रही है। इस पर स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट किया:
महिला का मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
नियमानुसार सजायाफ्ता या बर्खास्त कर्मचारी के भुगतानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक होते हैं।
विभाग के पास महिला की सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत नस्ती उपलब्ध नहीं थी, जिसके लिए संबंधित खंड कार्यालयों से पत्राचार किया गया।
जिला कोषालय अधिकारी से मार्गदर्शन मांगा गया था, जिन्होंने मामला कोर्ट में लंबित होने के कारण राज्य स्तर/उच्च अधिकारियों को संदर्भित करने का सुझाव दिया।
CMHO ने बताया कि वे 15 जुलाई को ही यह पूरा मामला राज्य कार्यालय को मार्गदर्शन हेतु भेज चुके हैं।
अधिकारी का बयान
CMHO ने कहा, "नियमों के तहत प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए बिना स्पष्ट निर्देशों के भुगतान संभव नहीं है। महिला द्वारा विभाग और अधिकारियों की छवि खराब करने तथा दबाव बनाने की नीयत से अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से असत्य हैं।"
