एमसीबी। भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी जिला एमसीबी के चेयरमैन शैलेश जैन ने हाल ही में मीडिया में प्रकाशित उन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अविनाश खरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी यह विषय उठाया जा चुका है और उस समय इसकी विस्तृत जांच कर सभी तथ्यों का परीक्षण किया गया था।
शैलेश जैन ने कहा कि उस दौरान अधिवक्ता रामनरेश पटेल द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच स्वयं उनके द्वारा ही की गई थी। जांच के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज और अभिलेख उनके समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। विस्तृत परीक्षण के बाद वे स्वयं जांच से संतुष्ट हुए थे, जिसके उपरांत मामले का विधिवत पटाक्षेप कर दिया गया था।
उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा पूरे मामले का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर राज्य शाखा को भी भेजा गया था और आवश्यक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया था। इसलिए अब उसी विषय को दोबारा उठाकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना उचित नहीं है।
रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन ने कहा कि अधिवक्ता रामनरेश पटेल को उस समय मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) का प्रभारी भी बनाया गया था, ताकि वे निष्पक्ष रूप से पूरे मामले की जांच कर सकें। जांच के दौरान सभी रिकॉर्ड और तथ्य उनके समक्ष उपलब्ध कराए गए थे, जिनका परीक्षण करने के बाद उन्होंने किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई थी।
शैलेश जैन ने कहा कि व्यक्तिगत अथवा राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी जैसे सेवा एवं मानवता के लिए समर्पित संगठन के नाम और मंच का उपयोग करना पूरी तरह अनुचित है। इससे संगठन की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है तथा जिले और राज्य स्तर पर उसकी सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि तथ्यों की अनदेखी कर पुराने मामलों को अनावश्यक रूप से तूल देने के बजाय जनहित एवं सेवा कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाए, जिससे रेडक्रॉस सोसाइटी की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे।
