एमसीबी। जिले में अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और न्यायालयीन कसौटी पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से शनिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में "विवेचना सुधार एवं न्यायालयीन दोषमुक्ति" विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा (आईपीएस) तथा पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह (आईपीएस) के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक सहित जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी, विवेचक अधिकारी तथा अभियोजन विभाग के वरिष्ठ कानूनविद उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ, जिसके बाद जिला लोक अभियोजन अधिकारी (डीपीओ), अतिरिक्त जिला लोक अभियोजकों (एडीपीओ) तथा सहायक शासकीय अधिवक्ताओं ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं विभिन्न विशेष अधिनियमों से जुड़े प्रकरणों की गुणवत्तापूर्ण विवेचना पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि विवेचना के दौरान छोटी-छोटी प्रक्रियागत त्रुटियां भी न्यायालय में अभियोजन पक्ष को कमजोर कर सकती हैं, जिससे आरोपी दोषमुक्त हो जाते हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन, घटनास्थल के सूक्ष्म निरीक्षण, दस्तावेजों के सही संधारण, गवाहों के सटीक बयान तथा कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करने पर विशेष जोर दिया गया।
सेमिनार में कानूनविदों ने विवेचकों को न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से भी अवगत कराया तथा विभिन्न मामलों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार मजबूत विवेचना से दोषसिद्धि की संभावना बढ़ाई जा सकती है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो अधिनियम सहित अन्य विशेष कानूनों से जुड़े मामलों में अनुसंधान की बारीकियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान थाना एवं चौकी प्रभारियों सहित विवेचकों ने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली कानूनी एवं व्यावहारिक समस्याओं से संबंधित अनेक प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे, जिनका विस्तार से समाधान किया गया। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों और मार्गदर्शन से पुलिस अधिकारियों ने विवेचना की गुणवत्ता सुधारने तथा न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
सेमिनार में जिला लोक अभियोजन अधिकारी एच.के. पाण्डेय, अतिरिक्त जिला लोक अभियोजक प्रमोद केरकेट्टा, सौरभ समाया, फकीर चंद, जितेन्द्र कुमार, सहायक शासकीय अधिवक्ता गोपाल दास, कैलाश विश्वकर्मा तथा विशेष सहायक शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो) घनश्याम राय ने अपने अनुभव साझा करते हुए विवेचना को अधिक प्रभावी बनाने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पुलिस विभाग की ओर से नगर पुलिस अधीक्षक चिरमिरी दीपिका मिंज, एसडीओपी जनकपुर अलेक्सियस टोप्पो, थाना प्रभारी कोतवाली मनेंद्रगढ़ निरीक्षक विवेक पाटले, थाना प्रभारी केल्हारी निरीक्षक मनीष धुर्वे, थाना प्रभारी चिरमिरी उप निरीक्षक विजय सिंह सहित जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी तथा उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक और प्रधान आरक्षक स्तर के विवेचक उपस्थित रहे।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता में सुधार लाकर न्यायालयीन दोषमुक्ति की घटनाओं को कम करना, वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा पुलिस अधिकारियों को नवीन कानूनी प्रावधानों से अद्यतन कर अपराध अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाना रहा। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में पुलिस विवेचना की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करेंगे तथा अपराधियों को कानून के दायरे में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
