मनेन्द्रगढ़ -धमाका: जांच से पहले ही महिला बाल विकास विभाग ने दे दी थी क्लीन चिट, अब संचालक की प्रेस विज्ञप्ति सवालों के घेरे में
कार्रवाई की अनुशंसा: जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा पर गिरी गाज; नियमों को ताक पर रख कर की गई थी खरीदी
मनेन्द्रगढ़। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में वितरित किए गए कथित नकली मंगलसूत्र का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सौरव मिश्रा द्वारा की गई शिकायत जिला प्रशासन की जांच में प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की पुष्टि करते हुए दोषी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।
इस खुलासे के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग बैकफुट पर आ गया है, क्योंकि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही विभागीय संचालक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले को निराधार बताते हुए क्लीन चिट दे दी थी। अब विभाग की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
बीती 10 फरवरी 2026 को खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इसमें स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित कई दिग्गज शामिल हुए थे। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 184 जोड़ों का विवाह कराया गया। विवाह के बाद नवविवाहित युवतियों ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उन्हें चांदी के नाम पर 'गिलेट' (सस्ती धातु) या बेहद घटिया क्वालिटी के मंगलसूत्र दिए गए हैं। इसके बाद 18 जून 2026 को कांग्रेस नेता सौरव मिश्रा ने कलेक्टर से इसकी लिखित शिकायत की थी।
जांच रिपोर्ट में उजागर हुईं ये बड़ी कड़ियां:
नियमों को ताक पर रखा: जिला स्तरीय क्रय समिति ने 'GeM' पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से चांदी के मंगलसूत्र खरीदने की अनुशंसा की थी। लेकिन जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) आदित्य शर्मा ने समिति के फैसले को दरकिनार कर सीमित निविदा (कोटेशन) के जरिए मनमानी खरीदी की।
अधिकारियों के दस्तखत गायब: कोटेशन प्रक्रिया में क्रय समिति के सदस्यों से कोई अप्रूवल या हस्ताक्षर नहीं लिए गए। सामग्री का न तो भौतिक सत्यापन कराया गया और न ही भुगतान से पहले प्रशासनिक मंजूरी ली गई।
चोरी पकड़े जाने का डर! खातों में डाले पैसे: शिकायत सामने आने के बाद विभाग ने गुपचुप तरीके से संबंधित सप्लाई फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र 1,000 रूपए की कटौती की और कुल ₹1,84,000 रूपए पीड़ित महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद फर्म को 12.85 लाख का भुगतान किया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि अगर मंगलसूत्र असली थे, तो भुगतान काटकर महिलाओं के खाते में पैसे क्यों भेजे गए।
कलेक्टर का कड़ा रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने 19 जून 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक को पत्र भेजा है। इसमें साफ लिखा है—"जांच समिति के प्रतिवेदन अनुसार प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई है।" इसके साथ ही दोषी अधिकारी आदित्य शर्मा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
मंत्री की छवि चमकाने का प्रयास: कांग्रेस
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि आखिर किसके इशारे पर जांच पूरी होने से पहले ही विभाग ने झूठ का पुलिंदा जारी कर जनता को गुमराह किया। क्या यह महिला एवं बाल विकास मंत्री की छवि चमकाने और भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की साजिश थी।
कांग्रेस नेताओं में आक्रोश:
मामले को लेकर पूर्व पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल, जिला महामंत्री पूनम सिंह, रूमा चटर्जी, पार्षद किरण कुजूर, हमीदा खातून और शोभना वर्मा ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि यह गरीब बेटियों के सम्मान और सरकारी साख से खिलवाड़ है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
