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स्वच्छ भारत मिशन में भ्रष्टाचार का आरोप: ददरा पारा में विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवार आज भी खुले में शौच को मजबूर, जांच और कार्रवाई की मांग

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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Jul 03, 20263 min read40 views
स्वच्छ भारत मिशन में भ्रष्टाचार का आरोप: ददरा पारा में विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवार आज भी खुले में शौच को मजबूर, जांच और कार्रवाई की मांग

जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति सुखमंती सिंह ने उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर एफआईआर और 15 दिनों में नए शौचालय निर्माण की उठाई मांग

मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की जनपद पंचायत भरतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलझर के आश्रित ग्राम सनबोरा के ददरा पारा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालयों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इस मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति तथा आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष सुखमंती सिंह ने जिला प्रशासन से तत्काल उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

श्रीमती सिंह ने आरोप लगाया कि ददरा पारा में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बनाए गए अधिकांश शौचालय निम्न गुणवत्ता के हैं और उपयोग के योग्य नहीं हैं। उनका कहना है कि लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद लाभार्थी आज भी खुले में तथा जंगलों में शौच जाने को विवश हैं। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगाने के साथ ही विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के सम्मान और मूलभूत अधिकारों का भी उल्लंघन है।

उन्होंने बताया कि कई शौचालयों का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। कहीं दरवाजे नहीं लगाए गए, कहीं पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, तो कई स्थानों पर सेप्टिक टैंक एवं गड्ढों का निर्माण भी अधूरा या तकनीकी मानकों के विपरीत किया गया है। अनेक शौचालय निर्माण के कुछ ही समय बाद क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे वे पूरी तरह अनुपयोगी बन चुके हैं।

सुखमंती सिंह ने आरोप लगाया कि मौके पर शौचालय उपयोग योग्य नहीं होने के बावजूद दस्तावेजों में निर्माण कार्य पूर्ण दर्शाकर पूरी सरकारी राशि का भुगतान कर दिया गया। उन्होंने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग और योजनाओं में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बताते हुए इसकी निष्पक्ष तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को शौच जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक नहीं पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

श्रीमती सिंह ने जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार, संबंधित इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए तथा शासकीय राशि की वसूली की जाए। साथ ही ददरा पारा के सभी प्रभावित परिवारों के लिए 15 दिनों के भीतर गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नए शौचालयों का निर्माण कराया जाए और विशेष पिछड़ी जनजाति के सभी पात्र परिवारों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाए।

सुखमंती सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला, तो जनजातीय समाज के साथ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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