मनेन्द्रगढ़ -30 जून। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के परिपालन में सोमवार को उप जेल मनेन्द्रगढ़ का औचक निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष योगेश पारिक के नेतृत्व में गठित जिला स्तरीय निरीक्षण समिति द्वारा किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल में बंदियों को मिल रही मूलभूत सुविधाओं, उनकी मानवाधिकार स्थिति और विधिक सहायता की उपलब्धता का गहन परीक्षण करना था।
निरीक्षण समिति ने जेल परिसर का विस्तृत भ्रमण कर बंदियों से सीधा संवाद स्थापित किया। इस दौरान बंदियों से उनकी समस्याओं, प्रकरणों की स्थिति और जेल प्रशासन के व्यवहार को लेकर जानकारी ली गई। समिति ने स्पष्ट किया कि जेल में किसी भी बंदी के साथ जातिगत या अन्य किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी बंदियों को कानूनन समान अधिकार और समय पर उचित विधिक सहायता मिलना सुनिश्चित किया जाए।
मूलभूत सुविधाओं की बारीकी से जांच
निरीक्षण दल ने जेल में बंदियों के रहने की व्यवस्था, बिस्तरों की उपलब्धता, शौचालयों की स्वच्छता, पेयजल की व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके साथ ही, जेल परिसर में संचालित लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। प्रधान जिला न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि बंदियों के विधिक व संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए और न्याय तक उनकी सहज पहुंच में कोई बाधा न आए।
त्रैमासिक निरीक्षण से होगी सतत निगरानी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत जिला स्तरीय विजिटर बोर्ड द्वारा हर तिमाही में उप जेल मनेन्द्रगढ़ का नियमित और औचक निरीक्षण किया जाता है। इसका उद्देश्य जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली की सतत निगरानी करना और बंदियों की मानवीय गरिमा को बनाए रखना है।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अमृता दिनेश मिश्रा, एडिशनल कलेक्टर अनिल सिदार, एडिशनल एसपी पुष्पेन्द्र नायक, पैनल अधिवक्ता कल्याण केसरी और पैरालीगल वालंटियर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
