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सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा ने जगाई सांस्कृतिक चेतना, प्रदेश के साहित्यकारों और संस्कृति कर्मियों का बना ऐतिहासिक संगम

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा ने जगाई सांस्कृतिक चेतना, प्रदेश के साहित्यकारों और संस्कृति कर्मियों का बना ऐतिहासिक संगम

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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Jun 28, 20263 min read55 views
सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा ने जगाई सांस्कृतिक चेतना, प्रदेश के साहित्यकारों और संस्कृति कर्मियों का बना ऐतिहासिक संगम

एमसीबी।

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, साहित्यिक और वैचारिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने वाली ऐतिहासिक पहल साबित हुई। इस यात्रा में प्रदेश के पद्मश्री, पद्मविभूषण, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत साहित्यकारों, कलाकारों, संस्कृति कर्मियों, कवियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता कर सांस्कृतिक एकता और साहित्यिक संवाद का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के आमंत्रण पर एमसीबी जिले से नगर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक विनोद तिवारी तथा साहित्यकार मृत्युंजय सोनी इस यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के अनुभव साझा करते हुए विनोद तिवारी ने कहा कि यह संपूर्ण यात्रा सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली रही। यात्रा के दौरान साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति कर्मियों ने अपनी-अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं तथा एक-दूसरे के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किए। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रतिभाओं के साथ निकटता से संवाद स्थापित करने का यह अवसर अत्यंत प्रेरणादायक रहा।

उन्होंने बताया कि इस यात्रा में प्रदेश के लगभग एक हजार प्रतिभागियों का दल विशेष ट्रेन से रायपुर से सोमनाथ के लिए रवाना हुआ। इस विशेष ट्रेन को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं संस्कृति एवं पर्यटन विभाग की ओर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। दल में पद्मश्री, पद्मविभूषण सम्मानित विभूतियों, साहित्यकारों, रचनाधर्मियों, कवियों, पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

सोमनाथ पहुंचने पर यात्रियों ने प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान श्री सोमनाथ महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। साथ ही मंदिर के गौरवशाली इतिहास को चलचित्र के माध्यम से जाना। यात्रा के दौरान सोमनाथ मंदिर के अतिरिक्त अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के दर्शन किए गए। समुद्र तट पर स्थित दिव्य शिवलिंग के दर्शन यात्रियों के लिए अत्यंत अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव रहे।

साहित्यकार मृत्युंजय सोनी ने कहा कि इस यात्रा ने पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्रदान किया। देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकारों एवं साहित्यकारों से आत्मीय परिचय और संवाद स्थापित होना इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

यात्रा से लौटने के बाद विनोद तिवारी एवं मृत्युंजय सोनी ने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, संस्कृति विभाग एवं पर्यटन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक यात्राएं प्रदेश की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के साथ-साथ समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को भी मजबूत करती हैं। उन्होंने इस प्रेरणादायी आयोजन के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा स्थानीय विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति भी हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।

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