मनेंद्रगढ़, 29 अक्टूबर 2026। मनेंद्रगढ़ के बहुचर्चित करण राठौर हत्याकांड में प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या के अपराध के साथ बलवा के मामले में भी दोषियों को दंडित किया है। 5 सितंबर 2025 को हुई इस वारदात में करण राठौर की जान चली गई थी। करीब एक वर्ष बाद आए इस फैसले को प्रकरण की न्यायिक कार्यवाही में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चाकू से प्राणघातक हमला, मौके पर गई थी करण की जान
प्रकरण के अनुसार, 5 सितंबर 2025 की रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच मनेंद्रगढ़ के बताशा लाइन स्थित हनुमान मंदिर के सामने वाली गली में आरोपियों ने कथित तौर पर विधि विरुद्ध जमाव बनाकर घातक हथियारों से हमला किया था। इसी दौरान करण राठौर पर चाकू से प्राणघातक वार किया गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
मामले में पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने सात आरोपियों को संबंधित धाराओं में दोषसिद्ध ठहराया।
इन सात आरोपियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा
न्यायालय ने निम्नलिखित आरोपियों को दोषसिद्ध कर दंडित किया है:
रितिक मिश्रा
सचिन जैन
राशिद खान
अमन केंवट उर्फ बुटई
भावेश पाटिल
रौनिल मिश्रा उर्फ कुक्कू

मो. अकरम उर्फ अक्कू
हत्या में उम्रकैद, बलवा के मामले में दो साल का सश्रम कारावास
न्यायालय ने सातों दोषियों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(3) के तहत बलवा के अपराध में दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास और 500-500 रुपये का अर्थदंड सुनाया है। वहीं, धारा 103(1) सहपठित धारा 191 के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 1,000-1,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
न्यायालय ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को आदेशानुसार अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
प्रभात सोंधिया उर्फ रवि को एक आरोप से मिली दोषमुक्ति
इसी प्रकरण में आरोपी प्रभात सोंधिया उर्फ रवि के विरुद्ध बीएनएस की धारा 249 के तहत लगाए गए आरोप को अभियोजन पक्ष युक्तियुक्त संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इस आधार पर न्यायालय ने उसे संदेह का लाभ देते हुए धारा 249 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है।
मृतक के माता-पिता को मिलेगा 10 हजार रुपये का प्रतिकर
न्यायालय ने सातों दोषियों पर कुल 10,500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है। आदेश के मुताबिक, अर्थदंड की राशि जमा होने पर उसमें से 10,000 रुपये मृतक करण राठौर के माता अथवा पिता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे, जबकि शेष 500 रुपये शासन के पक्ष में जमा किए जाएंगे।
करण राठौर हत्याकांड में आया यह फैसला गंभीर आपराधिक मामलों में विवेचना, साक्ष्यों के संकलन और न्यायालयीन अभियोजन की भूमिका को रेखांकित करता है।
