मनेंद्रगढ़। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। नांगा बैगा जनशक्ति संगठन एवं बैगा समाज के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि अन्य जातियों के कुछ लोगों ने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैगा जनजाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल किए और इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर वर्षों से शासकीय सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।
मामले को लेकर भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने गंभीरता जताते हुए महामहिम राज्यपाल, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र भेजा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से कराने की मांग की है।
बिलासपुर और जीपीएम क्षेत्र में 55 लोगों पर आरोप
पूर्व विधायक गुलाब कमरो द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, ग्राम पोड़ी, थाना सीपत, विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर सहित बिलासपुर एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र में करीब 55 व्यक्तियों द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त कर शासकीय सेवा में नियुक्ति हासिल करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर विभिन्न विभागों में रेंजर, एसडीओ, पटवारी, औषधि संयोजक, एमबीबीएस चिकित्सक, वनरक्षक, भृत्य सहित शिक्षक एवं सहायक शिक्षक जैसे पदों पर लोग शासकीय सेवा का लाभ ले रहे हैं। पत्र में करीब 45 शिक्षक/सहायक शिक्षकों के भी इस सूची में शामिल होने का उल्लेख किया गया है।
सामाजिक एवं पारंपरिक संबंध नहीं होने का दावा

नांगा बैगा जनशक्ति संगठन एवं बैगा समाज के पदाधिकारियों का आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों का बैगा समाज के वास्तविक परिवारों और पारंपरिक गांवों से सामाजिक एवं पारंपरिक संबंध नहीं है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस संबंध में ग्रामवासियों के पंचनामे तथा बैगा परिवारों की ग्रामवार सर्वेक्षण सूची भी प्रस्तुत की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इन दस्तावेजों और संबंधित जाति प्रमाण पत्रों का सक्षम स्तर पर सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि कथित फर्जी बैगा जाति प्रमाण पत्र से जुड़े 55 लोगों का मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने चिंता जताते हुए राज्यपाल एवं संबंधित विभागों से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रमाण पत्र फर्जी मिले तो नियुक्तियां निरस्त करने की मांग
पूर्व विधायक ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में प्रमाण पत्र फर्जी अथवा कूटरचित पाए जाते हैं, तो नियमानुसार संबंधित व्यक्तियों की शासकीय नियुक्तियां निरस्त करने के साथ ही दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
गुलाब कमरो का कहना है कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए निर्धारित अधिकार और आरक्षण वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए। यदि बैगा जनजाति के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए किसी ने सरकारी नौकरी हासिल की है, तो यह शासन की व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी के साथ-साथ वास्तविक आदिवासी युवाओं के अधिकारों पर भी गंभीर चोट है।
