एनएच-43 पर पशुओं की सुरक्षा का ‘रेडियम कवच’, 346 से अधिक मवेशियों को लगाया गया बेल्ट

रात में हेडलाइट पड़ते ही दूर से चमकेंगे रेडियम बेल्ट, सड़क हादसों की रोकथाम के लिए चार टीमें लगातार सक्रिय

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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एनएच-43 पर पशुओं की सुरक्षा का ‘रेडियम कवच’, 346 से अधिक मवेशियों को लगाया गया बेल्ट

एमसीबी, 15 सितंबर 2026। राष्ट्रीय राजमार्ग और व्यस्त सड़कों पर निराश्रित एवं पालतू पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं तथा जनहानि-पशुहानि की रोकथाम के लिए मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन एवं पशुधन विकास विभाग की पहल पर एनएच-43 पर विचरण करने वाले निराश्रित पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट लगाए जा रहे हैं। अब तक 346 से अधिक पशुओं को रेडियम बेल्ट लगाए जा चुके हैं और अभियान लगातार जारी है।

कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के नेतृत्व एवं पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान में राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों का भी सहयोग लिया जा रहा है।

रात के अंधेरे में दूर से नजर आएंगे पशु

राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय अचानक पशुओं के सड़क पर आ जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट लगाए जा रहे हैं। वाहन की हेडलाइट पड़ते ही ये बेल्ट दूर से चमकेंगे, जिससे वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशु पहले ही दिखाई दे सकेंगे। इससे चालक समय रहते वाहन की गति नियंत्रित कर दुर्घटना की आशंका को कम कर सकेंगे।

संवेदनशील स्थानों पर विशेष फोकस

अभियान के तहत एनएच-43 के उन स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां बड़ी संख्या में पशुओं के विचरण के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इनमें पीडब्ल्यूडी तिराहा, एलआईसी कार्यालय, खेडिया टॉकीज, सिद्ध बाबा मंदिर घाट, घुटरीटोला बैरियर तथा कठौतिया से महाराजपुर बैरियर के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।

एनएच-43 पर पशुओं की सुरक्षा का ‘रेडियम कवच’, 346 से अधिक मवेशियों को लगाया गया बेल्ट (2)

इन संवेदनशील क्षेत्रों में 500 से अधिक घुमंतू पशुओं के विचरण को देखते हुए अभियान को विशेष प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।

चार टीमें कर रहीं लगातार निगरानी

सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर मोबाइल वेटरनरी यूनिट सहित कुल चार टीमों का गठन किया गया है। टीमें राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास के क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर निराश्रित पशुओं को चिन्हित कर रही हैं तथा उनके गले में रेडियम बेल्ट लगा रही हैं।

अभियान के तहत अब तक 346 से अधिक पशुओं को रेडियम बेल्ट लगाए जा चुके हैं। पशुओं को चिन्हित करने और उन्हें सुरक्षित करने का कार्य लगातार जारी है।

104 पालतू पशुओं की टैगिंग, मालिक की आसानी से होगी पहचान

अभियान केवल निराश्रित पशुओं तक सीमित नहीं है। खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों को जागरूक करने के साथ पालतू पशुओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उनकी टैगिंग भी की जा रही है। अब तक 104 पालतू पशुओं के कानों में टैग लगाए जा चुके हैं।

टैगिंग से पशु के मालिक की पहचान आसानी से की जा सकेगी। इसके अलावा पशु चोरी होने, बीमा संबंधी कार्यवाही, मृत पशु के पोस्टमार्टम तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने में भी यह प्रक्रिया उपयोगी साबित होगी।

एनएच-43 पर पशुओं की सुरक्षा का ‘रेडियम कवच’, 346 से अधिक मवेशियों को लगाया गया बेल्ट (2)

पशुपालकों से हाईवे पर मवेशी नहीं छोड़ने की अपील

पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक डॉ. तनवीर अहमद ने आम नागरिकों एवं पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने मवेशियों को राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा अन्य व्यस्त सड़कों पर खुला न छोड़ें। उन्होंने कहा कि पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने से न केवल उनकी जान बचाई जा सकेगी, बल्कि वाहन चालकों और आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

पशुधन विभाग की टीम निभा रही अहम भूमिका

अभियान को सफल बनाने में पशुधन विकास विभाग के डॉ. विनीत कुमार भारद्वाज (प्रभारी), विकेश कुमार पैकरा, रूपेन्द्र कुमार पटेल, गगन कुमार निषाद, शशिकांत पांडेय, संदीप कुमार यादव, मनीष यादव, मेवालाल सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

जिला प्रशासन की यह पहल एनएच-43 पर रात के समय पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ पशु सुरक्षा और सड़क सुरक्षा को एक साथ मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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