मनेंद्रगढ़। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में वर्ष 2024-25 के दौरान आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अब इस मामले में जांच रिपोर्ट और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के विरुद्ध मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के संचालन में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय शिकायत की थी। इसके बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ लिया।
इसी बीच विधायक कविता प्राण लहरे ने विधानसभा में इस विषय पर ध्यानाकर्षण सूचना प्रस्तुत कर सरकार से जवाब मांगा। विधानसभा में प्रस्तुत महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिवेदन में बताया गया कि वर्ष 2024-25 में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में लगभग 21 लाख रुपये के सामग्री क्रय एवं अन्य व्ययों से संबंधित शिकायत विभाग को प्राप्त हुई थी।
शिकायत मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय ने एमसीबी कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा था। कलेक्टर द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद विभाग ने तत्कालीन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा। हालांकि विभाग का कहना है कि संबंधित अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जवाब और उपलब्ध कराए गए दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए।
विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार, प्रथम दृष्टया प्राप्त तथ्यों के आधार पर अब मामले में औपचारिक विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सामाजिक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में इस योजना में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
विधानसभा तक पहुंचे इस प्रकरण के बाद एक बार फिर जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के क्रियान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब पूरे मामले में विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट और सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
