बदहाल सड़क बनी जिंदगी पर भारी: गर्भवती को 2 किलोमीटर स्ट्रेचर पर ढोकर पहुंचाया गया एम्बुलेंस तक, फिर अस्पताल पहुंची प्रसूता

छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा के पाटदरहा गांव का मामला, बारिश के बाद सड़क हुई जर्जर; एम्बुलेंस कर्मियों की तत्परता से समय पर मिला उपचार

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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बदहाल सड़क बनी जिंदगी पर भारी: गर्भवती को 2 किलोमीटर स्ट्रेचर पर ढोकर पहुंचाया गया एम्बुलेंस तक, फिर अस्पताल पहुंची प्रसूता

गरियाबंद/ओडिशा सीमा।

छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा क्षेत्र में सड़क की बदहाल स्थिति एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर सामने लेकर आई है। बारिश के कारण जर्जर और कीचड़युक्त सड़क के चलते एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके कारण प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को लगभग दो किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर लाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, यह मामला ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के बोडेन ब्लॉक अंतर्गत पाटदरहा गांव का है, जो छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की सीमा से लगा हुआ है। गांव की निवासी गर्भवती महिला ललिता मांझी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन लगातार बारिश से सड़क पूरी तरह कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।

ऐसी स्थिति में परिजनों और ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई और महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां एम्बुलेंस पहले से इंतजार कर रही थी। इसके बाद एम्बुलेंस कर्मियों ने बिना समय गंवाए महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय पर चिकित्सकीय उपचार मिल सका।

बदहाल सड़क बनी जिंदगी पर भारी: गर्भवती को 2 किलोमीटर स्ट्रेचर पर ढोकर पहुंचाया गया एम्बुलेंस तक, फिर अस्पताल पहुंची प्रसूता (2)

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण अंचलों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को उजागर करती है। बरसात के मौसम में अनेक गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासन से मांग की है कि पाटदरहा सहित सीमा क्षेत्र के दुर्गम गांवों की सड़कों का शीघ्र निर्माण एवं मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में लोगों को इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरी घटना में एम्बुलेंस कर्मचारियों की संवेदनशीलता और तत्परता की भी सराहना की जा रही है। यदि उनकी सक्रियता नहीं होती तो गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की जान खतरे में पड़ सकती थी। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता की ओर गंभीर संकेत देती है।

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