बैकुंठपुर (कोरिया)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गिरजापुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लगभग 13 लाख 76 हजार रुपये की लागत से पांडवपारा–चितवाहीपारा मार्ग पर निर्मित पुलिया की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 28 फरवरी 2025 को पूर्ण हुई यह पुलिया महज एक वर्ष के भीतर ही क्षतिग्रस्त होने लगी, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाल की बारिश के बाद पुलिया के दोनों किनारों पर तेज कटाव शुरू हो गया है। कई स्थानों पर सीमेंट की परत उखड़ने से भीतर लगी निर्माण सामग्री और पत्थर बाहर दिखाई देने लगे हैं। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया गया होता, तो इतनी कम अवधि में पुलिया की यह स्थिति नहीं होती।
निर्माण सामग्री और तकनीकी निगरानी पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में मानक गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका कहना है कि पुलिया में हैंड ब्रोकन स्टोन (हाथ से तोड़ी गई गिट्टी) का उपयोग किया गया, जिसकी गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी अधिकारियों द्वारा प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया, जिसके कारण निर्माण में संभावित अनियमितताओं पर समय रहते रोक नहीं लग सकी।
पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया के निर्माण के बाद पहली ही अच्छी बारिश में उसके दोनों ओर मिट्टी का कटाव होने लगा। पानी के तेज बहाव से सीमेंट की परतें बह गईं और निर्माण सामग्री बाहर दिखाई देने लगी। इससे पुलिया की मजबूती और उसकी दीर्घकालिक उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राहगीरों की सुरक्षा पर बढ़ा खतरा
कटाव के कारण पुलिया के दोनों ओर सड़क पर गड्ढे बन गए हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कार्य कराने और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।
समय-सीमा बैठकों के निर्देशों पर भी उठे सवाल
जिला प्रशासन की समय-सीमा बैठकों में विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश लगातार दिए जाते रहे हैं, लेकिन इस पुलिया की स्थिति को देखकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्माण कार्यों की नियमित और प्रभावी निगरानी हो रही है, तो एक वर्ष के भीतर ही करोड़ों नहीं बल्कि लाखों रुपये की लागत से बनी सार्वजनिक संपत्ति इस स्थिति में कैसे पहुंच गई।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पुलिया निर्माण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता, लापरवाही या गुणवत्ता में कमी की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों तथा निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
(नोट: समाचार में भ्रष्टाचार और मिलीभगत संबंधी आरोप ग्रामीणों के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच का निष्कर्ष सामने आना शेष है।)
